विभाग के अन्तर्गत संचालित परियोजनाएँ


दिनांक 04--05-2017 तक अद्यावधिक

                                    (क) राज्य सेक्टर के अनतर्गत संचालित योजनायें
1- दुग्ध उत्पादक सदस्यों को सहकारिताओं के अन्तर्गत प्रोत्साहित करना (गोकुल पुरस्कार)ः-
इस योजना के अनतर्गत दुग्ध सहकारिताओं से समब्द्ध दुग्ध उत्पादकों को उनके मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करने एवं दुधारू पशुओं के अच्छे रख-रखाव हेतु प्रोत्साहित कर अधिक दूघ उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक दुग्ध संध के सर्वाधिक दूध बिक्रय करने वाले एक दुग्ध उत्पादक को जो दुग्ध समिति के माध्यम से दुग्ध संध को दूध बिक्रय कर रहा हो, रू0 22,000.00 नकद एवं एक शील्ड जिस पर गाय-बछड़ा के साथ श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित रहती है, प्रदान की जाती है तथा प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादित करने वाले प्रथम कतीन दुग्ध उत्पादको को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार क्रमशः रू0 1.00,रू0 0.75 लाख व रू0 0.50 लाख नकद एवं एक शील्ड प्रदान की जाती है।
      2-दुग्ध विकास कार्य क्रम हेतु ग्रामीण अवस्थापना सुविधा
(आटोमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट व बल्क मिल्क कूलर की स्थापना)
इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में नई गठित, पुनर्गठित समितियों को वैज्ञानिक पद्वति के आधार पर दूध की नाप तौल, परीक्षण व दुग्ध मूल्य की जानकारी तत्काल दुग्ध उत्पादक को प्राप्त कराने व पूर्ण पारदर्शिता, समिति के प्रति विश्वास व जागरूकता लाने हेतु समिति स्तर पर ए0एम0सी0यू0(आटोमैटिक मिल्क् कलेक्शन यूनिट) संयंत्र की स्थापना तथा 5 से 10 दुग्ध समितियों के क्लस्टर में एक बी0एम0सी0(बल्क मिल्क कूलर) लगाया जायेगा। इसमें दूध की तत्काल चिलिंग की प्रक्रिया होने से दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी। योजनान्तर्गत निर्धारित मानक का 80 प्रतिशत अनुदान तथा 20 प्रतिशत समिति/ दुग्घ संघ द्वारा वहन किये जाने की व्यवस्था है।

3- ई-गवर्नेन्स (इन्फारमेशन टेक्नालाजी एण्ड कम्पयूटराइजेशन)
इस योजना के अन्तर्गत  साफ्टवेयर विकसित कराया गया है तथा कम्प्यूटर एवं हार्डवेयर की स्थापना कराये जाने की कार्यवाही की जाती है
4-पी0सी0डी0एफ0 के सुद्ढ़ीकरण हेतु ऋण योजनाः-
पी0सी0डी0एफ0 के सुद्ढ़ीकरण हेतु ऋण योजनान्तगर्त 10 एंकर डेरियों की स्थापना एवं 04 डेरी प्लान्ट्स का   आधुनिकीकरण कराया जा रहा है, जो निमन्वत है-

1- जनपद कानपुर नगर में 4.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता की पूर्ण स्वचालित डेरी प्लान्ट एवं 20 मीट्रिक टन दैनिक क्षमता पावडर प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है
2- जनपद कन्नौज में 1.00 ली0 प्रतिदिन क्षमता के गाय के दूध के यू0 एच0टी0 प्रसंस्करण से सम्बन्धित प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है
3- जनपद फिरोजाबाद में 1.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है। 
4- जनपद लखनऊ में 3000 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य  कराया जा रहा है
5- जनपद मुरादाबाद में 1.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य  कराया जा रहा है
6- जनपद गोरखपुर में 1.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है। 
7- जनपद मेरठ में 4.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है। 
8- जनपद फैजाबाद में 0.50 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थपना का कार्य कराया जा रहा है
9- जनपद बरेली में 1.00 ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है
10- जनपद वारणसी में 4.00 लाख ली0 प्रतिदिन क्षमता का मल्टी प्रोडक्ट डेरी फूड प्लान्ट की स्थापना का कार्य कराया जा रहा है
11- विभिन्न जनपदों के 04  डेरी प्लान्ट्स यथा-इलाहाबाद, झासी, अलीगढ़ एवं पराग डेरी नोयडा का सुदृढ़ीकरण कराये जाने का कार्य कराया जा रहा है

5- जनपद कानपुर में मिल्क पाउडर प्लाण्ट की स्थापनाः-
 जनपद कानपुर में आधुनिक डेरी प्लांट एवं 20 मी0 टन का मिल्क् पाउडर प्लाण्ट की स्थापना की जा रही है।
6- जनपद कन्नौज में काऊ मिल्क प्लाण्ट की स्थापना हेतु पी0सी0डी0एफ0 को ऋणः-
जनपद कन्नौज में   एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के काऊ मिल्क प्लाण्ट की स्थापना की जा रही है
7- विभूति खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ स्थित पराग केन्द्र के आधुनिकीकरण हेतु पी0सी0डी0एफ0 को ऋणः-
 विभूति खण्ड, गोमतीनगर लखनऊ स्थित पराग केन्द्र का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

(ख)- जिला सेक्टर के अन्तर्गत संचालित योजनायें-

1- दुग्ध संधो /समितियों के सुदृढ़ीकरण, पुर्नगठन एवं विस्तार (जिला योजना)ः-
(सामान्य/एस0सी0पी0)ः-27 सब्सिडी/20 सहायता अनुदान-

इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुग्ध संधो/समितियों के सुदृढ़ कर स्वावलम्बी बनाना व दुग्ध उत्पादन में दुग्ध उत्पादक सदस्यों की भागीदारी बढाने हेतु दुग्ध संधों/ समितियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था है। योजना के अन्तर्गत ग्रामीण अंचलों में दुग्ध सहकारी समितियों को गठित व बन्द दुग्ध समितियों को पुनर्गठित कर ग्रामीण दुग्ध समितियों को संचालित करने के लिए कार्यशील ूपजी, प्रबन्धकीय अनुदान यातायात अनुदान, हेड लोड अनुदान दुग्ध केन्द्रों एवं समिति पर वांछित अन्य आवश्यक उपकरण वाहन, दुग्धशाला/अवशीतन केन्द्रों की स्थापना, विस्तार एवं भूमि व्यवस्था हेतु उपलब्ध करायी जाती है।

2- दुग्ध उत्पादन वृद्धि हेतु दुग्ध उत्पादकों को तकनीकी निवेश योजना (जिला योजना)
(सामान्य/एस0सी0पी0)ः-
दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु दुग्ध उत्पादकों/ समितियों को तकनीकी निवेश कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेेश की सहकारी दुग्ध समितियों के दुग्ध उत्पादकों के दुधारू पशुओं को तकनीकी निवेश सुविधायें(प्रजनन कार्यक्रम व स्वास्थ्य कार्यक्रम) यथा -नस्ल सुधार, डिवर्मिग, टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराते हुए दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि लाया जाना है। योजनान्तर्गत धनराशि शत प्रतिशत अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी जाती है।

3- कृषक प्रषिक्षण कार्यक्रम (सामान्य/एस0सी0पी0)ः-
दुग्ध विकास विभाग के अन्तर्गत संचालित कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन हेतु सहकारी प्रशिक्षण संस्थाओं में ए0आई0 कार्यकर्ता, प्रबन्ध कमेटी सदस्य, ए0आई0 रिफ्रेसर, प्रोग्रेसिव प्रोड्यूसर, क्लीन मिल्क प्रोड्यूसर, मार्केटिंग स्टाफ, ए0एम0सी0यू0 व बी0एम0सी0 आपरेटर आदि को प्रषिक्षित कराया जाता है। योजनान्तर्गत धनराशि शत प्रतिषत अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी जाती है।

   (ग) केन्द्र पोषित योजनायें
        केन्द्र पुरोनिधानित योजनाये

1-दुग्ध विकास की राष्ट्रीय योजना-
वर्ष 2014-15 में पूर्व संचालित केन्द्र पुरोनिधानित योजनाओं को पुनर्गठन कर भारत सरकार द्वारा दुग्ध विकास की राष्ट्रीय योजना संचालित की जा रही है। दुग्ध विकास का राष्ट्रीय योजना के उद्देष्य निम्नवत हैः-
1- गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन हेतु अवस्थापना सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण तथा कोल्ड चेन की स्थापना जिससे कि कृषकों को उपभोक्ताओं से जोड़ना।
2- दुग्ध उपार्जन प्रसंस्करण तथा विपणन हेतु अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना।
3- दुग्ध उत्पादको हेतु प्रशिक्षण  अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना।
4- गाॅव स्तर पर दुग्ध सहकारी समितियों/उत्पादक कम्पनियों का सुदृढ़ीकरण।
5- तकनीकी निवे सुविधाओं यथा पशुआहार , मिनरल मिक्सचर उपलब्ध कराते हुए दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना।
6- दक्ष/योग्य(वायबिल) दुग्ध संघो/फेडरेन के पुनर्जीविकरण में सहयोग प्रदान करना ।
 

2- राष्टीय कृषि विकास योजनान्तर्गत दुग्धशालाओं का सुदृढ़ीकरणः-
राष्ट्ीय कृषि विकास योजनान्तर्गत दूरस्थ क्षेत्रों में दुग्ध सहकारिता की पैठ बढ़ा कर दुग्ध उपार्जन करने हेतु जनपद स्तर पर दुग्धशालाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाता है