दुग्धशाला विकास विभाग का थ्रस्ट एरिया


दिनांक 20--06-2017 तक अद्यावधिक

 
  1. ग्रामीण अंचलों को आटोमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट (ए०एम०सी०यू०) से आच्छादित किया जाना है ताकि समिति स्तर पर दूध के परीक्षण, नापतौल व दुग्ध कीमत की जानकारी दुग्ध उत्पादकों को तत्काल प्राप्त हो सके। यह व्यवस्था पारदर्शी होने से दुग्ध उत्पादकों को समिति के प्रति विश्वास व जागरूकता उत्पन्न होगी। इसी के साथ दुग्ध उत्पादको को ऑनलाइन दुग्ध मूल्य सीधे उनके खाते मे किया जायेगा।
     

  2. आस-पास की कुछ दुग्ध समितियों के दूध को उसके प्राकृतिक रूप में बनाये रखने के उद्देश्य से इन समितियों के मध्य बल्क मिल्क कूलरों की स्थापना ग्रमीण अंचलों में होने पर समिति का दूध इस मशीन में तत्काल ठण्डा होने लगेगा और बैक्टीरियल ग्रोथ रूक जाने से दूध प्राकृतिक अवस्था में बना रहेगा। बाद में यही दूध दुग्धशाला में प्रोसेसिंग प्रक्रिया के उपरांत एवं इससे बने दुग्ध अत्पाद नगरीय उपभोक्ताओं को प्राकृतिक फलेवर में उपलब्ध हो सकेगा जिससे इनकी बिक्री में बृद्धि होगी।
     

  3. नए दुग्ध उत्पाद बाजार में विपणन हेतु तैयार कर उपलब्ध कराया जायेगा। तथा वैल्यू एडेड दुग्ध उत्पादों का निर्माण कर बल्क वेडिंग मशीन, ट्रेटापैक एवं मिल्क पार्लर की व्यापक व्यवस्था से दुग्ध बिक्री बढेगी और दुग्ध उत्पादकों को उनके उत्पाद का समुचित दुग्ध मूल्य नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।
     

  4. ग्रामीण अंचलों में सहकारिता व निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करते हुए 50 हजार ग्रामों का अच्छादन प्रस्तावित है।

5. पी0सी0डी0एफ0, के सुदृढ़ीकरण योजनान्तर्गत 08 नवीन डेरी  प्लाण्ट यथा लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद एवं फैजाबाद का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही 04 डेरी प्लाण्ट यथा इलाहाबाद, झाँसी, नोएडा एवं अलीगढ़ का आधुनिकीकरण कराया जा रहा है। उक्त के अतिरिक्त अत्याधुनिक प्रयोगषाला, ऑनलाइन मानीटरिंग सिस्टम तथा कोल्डचेन बनाये जाने हेतु बी0एम0सी0 की भी स्थापना की जा रही है।