नयी दुग्ध समितियों का गठन एवं निबन्धन Last Updated Date: 18/05/2017


    समिति गठन एवं निबन्धन की प्रक्रिया

  1. नयी दुग्ध समितियों के गठन हेतु सर्व प्रथम जनपद के गठित दुग्ध मार्गो पर मार्ग के दोनों ओर निकटवर्ती क्षेत्रों, जहाँ दुग्ध उपलब्धिता है, का सर्वेक्षण कर उन क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया जाता है।
  2. सर्वेक्षण उपरान्त मार्केटेबुल सरप्लस दूध की अधिकता के आधार पर ग्रामों को चयन कर चिन्हित किया जाता है।
  3. इन ग्रामों में एक खुली आम सभा का आयोजन कर विभाग के उद्देश्य, समिति गठन के लाभों से ग्रामवासियों को अवगत कराया जाता है।
  4. गठित होने वाली प्रारम्भिक दुग्ध समिति का कार्यक्षेत्र कम से कम एक सम्पूर्ण राजस्व ग्राम होना चाहिए।
  5. सभा में आए दुग्ध उत्पादक जो अपना दूध सहकारी समिति के माध्यम से बिक्री हेतु अपनी सहमति देते हैं उनको सदस्य बनाकर न्यूनतम 40 सदस्यों की समिति का गठन किया जाता है। इन 40 सदस्यों के हस्ताक्षर निबन्धन प्रपत्र पर होते हैं। दुग्ध समिति के व्यवसाय एवं दुग्ध उत्पादकों/पशुपालकों को दुग्ध सहकारिता में विश्वास जागृत करने के दृष्टिकोण से दुग्ध समिति में अधिक से अधिक संख्या में सदस्य बनाया जाना उचित होता है।
  6. बनाये गये सदस्यों की एक आम सभा का आयोजन कर उस आम सभा हेतु सभापति एवं मुख्य प्रवर्तक का चयन किया जाता है।
  7. इन सदस्यों द्वारा खुली सभा में 11 सदस्यीय प्रस्तावित प्रबन्ध समिति का चयन लोकतांत्रिक आधार पर किया जाता है।
  8. समिति के उक्त 11 सदस्य मिलकर अपनों में से एक सभापति का चयन करते हैं और ग्राम के किसी शिक्षित दुग्ध उत्पादक/व्यक्ति को सचिव नामित करते हैं जो समिति के दिन प्रतिदिन के कार्यों का निष्पादन व अभिलेखों के रख-रखाव का कार्य करता है।
  9. समिति गठन के साथ ही समिति के निबन्धन की कार्यवाही की जाती है। निबन्धन के पश्चात् समिति प्रथम सामान्य निकाय बैठक आयोजित करेगी।
  10. समिति के निबन्धन के पश्चात् समिति अपने प्रबन्ध कमेटी के सदस्यों के विधिवत निर्वाचन हेतु प्रक्रिया प्रारम्भ करेगा। समिति का निर्वाचन समिति की उपविधि एवं उ0प्र0 राज्य सहकारी समिति निर्वाचन नियमावली-2014 के प्राविधानों के अनुसार कराना होता है।
  11. समिति का संचालन समिति की उपविधि, उ0प्र0 सहकारी समिति अधिनियम-1965 एवं उ0प्र0 सहकारी समिति नियमावली-1968 के प्राविधानों के अधीन होता है।